अवैध जुए का नया गढ़: गौरेला-पेंड्रा-मरवाही में फिर आबाद हुआ लाखों का फड़, पुलिस प्रशासन बेखबर!


प्रतिकात्मक फोटो
राजन सिंह चौहान
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही / बिलासपुर:
जिले में एक बार फिर कानून और व्यवस्था को ठेंगा दिखाते हुए अवैध जुए का एक बड़ा फड़ पूरी शान के साथ आबाद हो गया है। हैरानी की बात यह है कि स्थानीय पुलिस प्रशासन इस खेल से पूरी तरह बेखबर बना हुआ है, जबकि परदे के पीछे ‘जिला प्रकाश’ के संरक्षण में लाखों रुपये के दांव हर रोज खेले जा रहे हैं। चोरी-छिपे संचालित हो रहे इस अवैध कारोबार ने एक बार फिर महकमे की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पुलिस की आंखों में धूल, परदे के पीछे ‘जिला प्रकाश’ का खेल
प्रतिकात्मक फोटो
मुखबिरों और स्थानीय सूत्रों से मिली पुख्ता जानकारी के अनुसार, पुलिस की नजरों से बचकर एक बार फिर से सुनसान इलाकों या सुरक्षित ठिकानों पर जुए का यह विशाल फड़ सजाया जा रहा है। इस पूरे अवैध साम्राज्य के संचालन के पीछे ‘जिला प्रकाश’ का संरक्षण बताया जा रहा है, जिसकी शह पर यह कारोबार बेखौफ फल-फूल रहा है। कागजों और बयानों में अवैध गतिविधियों पर लगाम लगाने के दावे करने वाली पुलिस को इसकी भनक तक नहीं लगना, सिस्टम की बड़ी नाकामी को दर्शाता है।
अंतर-जिला जुआरियों का जमावड़ा, लग रहे हैं लाखों के दांव
इस फड़ की पहुंच सिर्फ स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका दायरा कई जिलों तक फैला हुआ है।
- प्रमुख जिले और क्षेत्र: प्रतिदिन गौरेला, मरवाही, पेंड्रा के अलावा पड़ोसी जिलों और क्षेत्रों जैसे अमरकंटक और कोतमा से दर्जनों शौकीन और शातिर जुआरी यहां पहुंच रहे हैं।
- बड़ा वित्तीय कारोबार: इस फड़ पर हर दिन हार-जीत का खेल छोटे-मोटे दांवों से नहीं, बल्कि लाखों रुपये के नकद लेनदेन के साथ चल रहा है।
हाईटेक तरीके अपना रहे जुआरी, चिरमिरी कनेक्शन आया सामने
पुलिस की दबिश और तकनीकी सर्विलांस से बचने के लिए जुआरियों ने बेहद शातिर और हाईटेक तरीके अपना रखे हैं:
- मोबाइल से दूरी: जुआरी अपने मुख्य और सामान्य इस्तेमाल वाले मोबाइल फोन या तो घरों में छोड़ आते हैं या अन्य सुरक्षित स्थानों पर रखते हैं।
- अज्ञात नंबरों का इस्तेमाल: आपस में संपर्क साधने के लिए वैकल्पिक और नए नंबरों का प्रयोग किया जा रहा है, ताकि किसी भी प्रकार की कॉल लोकेशन या पुलिस को भनक न लग सके।
- चिरमिरी का शातिर पार्टनर: सूत्रों के हवाले से यह भी खुलासा हुआ है कि इस पूरे सिंडिकेट में एमसीबी (MCB) जिले के चिरमिरी का एक शातिर व्यक्ति भी साझीदार के रूप में शामिल है। चर्चा है कि यही शख्स खाकी (पुलिस प्रशासन) को मैनेज करने और परदे के पीछे के समीकरण साधने का काम बखूबी संभाल रहा है।
तकनीकी जांच (CDR) से खुल सकते हैं बड़े राज
“यदि पुलिस प्रशासन या उच्चाधिकारियों द्वारा इस फड़ में शामिल लोगों के मोबाइल नंबरों की तकनीकी जांच और कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) की गहराई से छानबीन की जाए, तो एक बहुत बड़े जुआ सिंडिकेट और उसके सफेदपोश संरक्षकों का सनसनीखेज पर्दाफाश हो सकता है!”
फिलहाल, इस बड़े खुलासे के बाद देखना यह होगा कि क्या जिला प्रशासन और पुलिस के उच्च अधिकारी इस मामले का संज्ञान लेते हैं या फिर यह अवैध खेल यूं ही बेखौफ जारी रहता है।




