

राजन सिंह चौहान
गौरेला पेंड्रा मरवाही। आईजी सरगुजा रेंज के कड़े रुख और ताबड़तोड़ कार्रवाई के बाद संभाग के नामचीन जुआ सिंडीकेट में मची खलबली अब शांत होती दिख रही है। पुलिस की कड़ाई के कारण कुछ समय के लिए अलग-थलग हुआ यह सिंडीकेट एक बार फिर एकजुट हो गया है। जुआरियों ने पुलिस की आंखों में धूल झोंकने और तकनीकी सर्विलांस से बचने के लिए एक नया और बेहद शातिर सुरक्षित ठिकाना ढूंढ निकाला है।
मिली जानकारी के अनुसार, इस सिंडीकेट ने अब सूरजपुर, कोरिया और मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (एमसीबी) जिलों को छोड़ दिया है। इसके बजाय, अब गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (जीपीएम) और कोतमा (अनूपपुर, मप्र) जिले की सरहद (बॉर्डर) पर स्थित घने जंगलों को अपना नया ‘सेफ हेवन’ (सुरक्षित अड्डा) बना लिया है।
जंगलों में टेंट लगाकर चल रहा हाईटेक फड़
सूत्रों से मिली पुख्ता जानकारी के मुताबिक, इस नए ठिकाने पर जुए का फड़ बेहद शातिर तरीके से संचालित किया जा रहा है। पेंड्रा और कोतमा के बॉर्डर पर स्थित जंगल के भीतर बाकायदा बड़े-बड़े टेंट लगाए गए हैं, ताकि हवाई या दूरगामी नजरों से बचा जा सके।
इस पूरे काले कारोबार की कमान इलाके के नामचीन जुआड़ी संभाल रहे हैं, जिनमें मुख्य रूप से निम्नलिखित नाम सामने आ रहे हैं:
शमशेरा
प्रकाश
अतुल
सदा
जिला
इन्हीं मुख्य सरगनाओं की अगुवाई में यह जुआ फड़ इन दिनों बिना किसी डर के धड़ल्ले से चल रहा है।
रोजाना लग रहा लाखों का दांव, 3000 रुपये ‘नाल’ की वसूली
बॉर्डर का इलाका होने के कारण इस फड़ पर अंतरराज्यीय और अंतर्जिला जुआरियों का भारी जमावड़ा लग रहा है। रोजाना सैकड़ों की संख्या में रईसजादे और नामचीन जुआड़ी यहाँ पहुंच रहे हैं।
इन जिलों से पहुंच रहे हैं जुआड़ी:
इस फड़ में मुख्य रूप से कोतमा, सूरजपुर, मनेन्द्रगढ़, पेंड्रा और मरवाही इलाके के बड़े जुआड़ी हर दिन अपनी किस्मत आजमाने पहुंच रहे हैं। सूत्रों का दावा है कि यहाँ प्रतिदिन लाखों-करोड़ों रुपये का दांव लगाया जा रहा है।
इस सिंडीकेट की कमाई सिर्फ जुए की जीत-हार तक सीमित नहीं है। फड़ का संचालन करने वाले सरगना सुरक्षा और व्यवस्था के नाम पर प्रति जुआड़ी 3,000 रुपये की ‘नाल’ (कमीशन/एंट्री फीस) वसूल रहे हैं।
सर्विलांस से बचने का तोड़: मोबाइल सीधे ‘स्विच ऑफ’
पुलिस साइबर सेल और लोकेशन ट्रेसिंग से बचने के लिए इस बार सिंडीकेट ने एक नया और कड़ा नियम लागू किया है। सूत्रों के मुताबिक, फड़ तक पहुंचने के लिए एक निश्चित ठिकाना तय किया गया है।
नो-मोबाइल जोन: जैसे ही सभी जिलों के नामचीन जुआड़ी इस तय ठिकाने पर एकत्रित होते हैं, फड़ में एंट्री करने से पहले सभी के मोबाइल फोन बकायदा बंद (स्विच ऑफ) करा दिए जाते हैं। इसके बाद ही उन्हें मुख्य फड़ तक ले जाया जाता है, ताकि किसी भी हाल में पुलिस को लोकेशन या टावर डंप के जरिए तकनीकी सुराग न मिल सके।
खाकी का ‘कवच’ और 1000 रुपये ‘दिहाड़ी’ वाले मुखबिर
इस बार जुआ सिंडीकेट ने पुलिस की छापेमारी से बचने के लिए सुरक्षा का एक ऐसा चक्र तैयार किया है जिसे भेदना आसान नहीं है। सूत्रों से मिली चौंकाने वाली जानकारी के अनुसार, इस खेल को स्थानीय पुलिस के कुछ मातहतों का मूक संरक्षण (प्रोटेक्शन) मिला हुआ है, जिसकी वजह से निचले स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है।
इसके अलावा, सिंडीकेट ने जमीन पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं:
हाईटेक नेटवर्क: पुलिस की गाड़ियों की हलचल पर नजर रखने के लिए सरगना शमशेरा, प्रकाश, अतुल, सदा और जिला के द्वारा फड़ के चारों तरफ और मुख्य रास्तों पर अपने निजी मुखबिर (वॉचर्स) तैनात किए गए हैं।
तगड़ा पेमेंट: जुए के फड़ को सुरक्षित रखने के लिए इन मुखबिरों को प्रतिदिन 1,000 रुपये प्रति व्यक्ति के हिसाब से नकद भुगतान किया जा रहा है। जैसे ही कोई अनजान गाड़ी या पुलिस की टीम बॉर्डर की तरफ बढ़ती है, ये मुखबिर तुरंत फड़ संचालकों को अलर्ट कर देते हैं।
बिलासपुर रेंज आईजी और जीपीएम एसपी पर टिकी नजरें
हैरानी की बात है कि जंगलों में टेंट लगना, रोजाना सैकड़ों गाड़ियों और लोगों की आवाजाही होना, मोबाइल नेटवर्क का अचानक गायब होना और लाखों का लेन-देन होने के बावजूद स्थानीय प्रशासन अंजान बना बैठा है।
सरगुजा रेंज से खदेड़े जाने के बाद अब यह सिंडीकेट बिलासपुर रेंज की नाक के नीचे पैर पसार चुका है। स्थानीय पुलिसकर्मियों के संरक्षण की बात सामने आने के बाद अब जिला पुलिस की विश्वसनीयता भी दांव पर है। अब देखने वाली बात होगी कि इस बड़े खुलासे के बाद गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (GPM) के पुलिस अधीक्षक (SP) और बिलासपुर रेंज आईजी इस हाईटेक गठजोड़ को तोड़ने और इस अंतरराज्यीय जुआ सिंडीकेट को ध्वस्त करने के लिए किस प्रकार की कड़क अग्रिम कार्रवाई करते हैं।




