देखिए वीडियो,फतेहपुर में बैंक बीसी संचालक पर लाखों के गबन का आरोप: पीड़ित महिलाओं ने लगाई मुख्यमंत्री व डीजीपी से न्याय की गुहार,
पुलिस पर अभियुक्त को संरक्षण देने के गंभीर आरोप




राजन सिंह चौहान
फतेहपुर। जनपद फतेहपुर के थाना किशनपुर क्षेत्र से खाकी को शर्मसार करने और गरीब ग्रामीणों के विश्वास का कत्ल करने का एक बेहद गंभीर मामला प्रकाश में आया है। यहाँ बैंक ऑफ बड़ौदा (शाखा शिवपुरी) से संबद्ध एक बैंक बिजनेस कॉरेस्पॉन्डेंट (BC) संचालक द्वारा सीधे-साधे ग्रामीण परिवारों की जमा पूंजी हड़पने और स्थानीय पुलिस द्वारा उस पर पर्दा डालने का सनसनीखेज आरोप लगा है। न्याय न मिलने से हताश होकर पीड़ित महिलाओं ने अब उत्तर प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री और पुलिस महानिदेशक (DGP) को संयुक्त रूप से शिकायती पत्र भेजकर अपराधियों के साथ-साथ लापरवाह पुलिसकर्मियों पर भी सख्त कार्रवाई की मांग की है।
पहला मामला: बेटी की शादी/भविष्य के लिए रखी रकम का गबन
प्राप्त विवरण के अनुसार, पहला मामला ग्राम बरियापुर की निवासिनी राजकुमारी पत्नी लल्लू प्रसाद निषाद का है। राजकुमारी ने अपनी बेटी रुक्मनी के बैंक खाते (संख्या-48498100014371, बैंक ऑफ बड़ौदा, शाखा शिवपुरी) में सुरक्षित जमा कराने के उद्देश्य से ग्राम थुल्ली में संचालित बीसी सेंटर के मुख्य संचालक कृष्ण पाल को अलग-अलग किश्तों में कुल ₹1,64,200 नगद सौंपे थे। उक्त राशि ₹80,000, ₹49,000 और ₹35,000 की किश्तों में अपनी गाढ़ी कमाई से बचाकर दी गई थी। आरोप है कि जालसाज बीसी संचालक कृष्ण पाल ने महिला के सीधेपन का फायदा उठाते हुए इस पूरी रकम को खाते में जमा ही नहीं किया और अमानत में खयानत करते हुए पूरी रकम निजी उपयोग में लेकर डकार गया।
दूसरा मामला: जीवन भर की जमापूंजी हड़पी, ₹2.85 लाख से अधिक की चपत

धोखाधड़ी का यह जाल केवल एक महिला तक सीमित नहीं था। इसी बीसी संचालक कृष्ण पाल (मोबाइल नंबर: 9651896198) ने ग्राम कुल्ली (दरियापुर) की रहने वाली एक अन्य गरीब महिला शकुंतला देवी पत्नी विष्णु को भी अपना शिकार बनाया। शकुंतला देवी ने अपने जीवन भर की गाढ़ी कमाई का कुल ₹2,85,800 नगद इस विश्वास के साथ कृष्ण पाल को दिया था कि वह इसे उनके बैंक खाते (संख्या- 46498100003219, बैंक ऑफ बड़ौदा) में सुरक्षित जमा कर देगा। परंतु शातिर जालसाज ने शकुंतला देवी के सीधेपन का फायदा उठाते हुए इस संपूर्ण राशि का भी आपराधिक गबन कर लिया और इसे स्वयं हड़प कर बैठ गया।
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पैसे मांगने पर दबंगई, जान से मारने की धमकी


जब दोनों पीड़ित महिलाओं को अपने साथ हुई इस भारी वित्तीय धोखाधड़ी की भनक लगी और उन्होंने बीसी संचालक से अपने पैसे वापस मांगे, तो आरोपी का रवैया बेहद हिंसक और दबंगई भरा हो गया। पीड़ितों का आरोप है कि कृष्ण पाल और उसके परिजनों ने उन्हें सार्वजनिक रूप से भद्दी-भद्दी गालियां दीं, समाज में जलील किया और पैसे वापस मांगने या कहीं भी शिकायत करने पर जान से मारने व गायब करवा देने की खुली धमकी दी।
किशनपुर पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल, आरोपी को संरक्षण देने का आरोप



इस पूरे प्रकरण में सबसे ज्यादा चौंकाने वाली भूमिका स्थानीय किशनपुर थाना पुलिस की रही है। दोनों पीड़ितों ने थाने के प्रभारी निरीक्षक (SHO) को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर लिखित शिकायत सौंपी थी। महिलाओं का आरोप है कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय के स्पष्ट दिशा-निर्देशों और कानूनों का खुला उल्लंघन करते हुए किशनपुर पुलिस ने न तो मामले की एफआईआर (FIR) दर्ज की और न ही उन्हें शिकायत पत्र की कोई पावती (Acknowledgment Receipt) दी।
पीड़ितों ने यह भी बताया कि थाने पर तैनात पुलिसकर्मी उनकी मदद करने के बजाय उल्टा आरोपी बीसी संचालक का पक्ष ले रहे हैं। पुलिसकर्मियों द्वारा पीड़ितों को यह कहकर डराया-धमकाया जा रहा है कि “ज्यादा ब्याज के चक्कर में पैसे दिए थे, अब यह डूब जाएंगे, इसमें पुलिस कुछ नहीं करेगी।” बैंक ऑफ बड़ौदा के अधिकारियों और स्थानीय पुलिस (थाना खखरैरू व किशनपुर) की इस उदासीनता के कारण आरोपी बीसी संचालक कानून के शिकंजे से पूरी तरह बेखौफ घूम रहा है।
भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 के तहत बनते हैं गंभीर अपराध

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, आरोपी कृष्ण पाल और उसके सहयोगियों का यह कृत्य भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत एक गंभीर संज्ञेय (Cognizable) अपराध है, जिसके तहत निम्नलिखित धाराएं आरोपित होनी चाहिए:
धारा 316 BNS (अपराधिक न्यासभंग): अधिकृत बैंक बीसी एजेंट के रूप में सौंपे गए रुपयों (अमानत) का गबन करना।
धारा 318 BNS (धोखाधड़ी/Cheating): छलपूर्वक व बेईमानी से पीड़ितों की संपत्ति को अपने पास रख लेना और उसे खाते में जमा न करना।
धारा 351 BNS (अपराधिक धमकी): हक के पैसे मांगने पर पीड़ित महिलाओं व उनके परिवार को जान से मारने की धमकी देना।
धारा 296 BNS (अश्लील कार्य और शब्द): सार्वजनिक रूप से महिलाओं को अपमानित करना और अभद्र गालियां देना।
धारा 61 BNS (आपराधिक साजिश): आरोपी और उसके घरवालों द्वारा मिलकर पैसों को हड़पने और विवाद करने की योजना बनाना।
उच्चाधिकारियों से हस्तक्षेप और सख्त कार्रवाई की गुहार
स्थानीय पुलिस के रवैये से तंग आकर दोनों महिलाओं ने अब सूबे के मुखिया माननीय मुख्यमंत्री महोदय, पुलिस महानिदेशक (DGP) लखनऊ और पुलिस अधीक्षक (SP) फतेहपुर का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने अपने पत्रों के माध्यम से मांग की है कि:
दोषी बीसी संचालक कृष्ण पाल और उसके सहयोगियों के खिलाफ सुसंगत धाराओं के तहत तत्काल प्राथमिकी (FIR) दर्ज की जाए।
पीड़ितों की डूबी हुई कुल धनराशि (₹1,64,200 और ₹2,85,800) को जल्द से जल्द बरामद (Recover) करवाकर वापस दिलाई जाए।
पीड़ित महिलाओं की लिखित शिकायत को दबाने, पावती न देने और आरोपी को अप्रत्यक्ष रूप से संरक्षण देने वाले थाना किशनपुर के प्रभारी निरीक्षक (SHO) व दोषी पुलिसकर्मियों के विरुद्ध सख्त विभागीय व अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए ताकि जनता का पुलिस पर विश्वास बहाल हो सके।
अब देखना यह है कि राजधानी से आदेश जारी होने के बाद फतेहपुर पुलिस प्रशासन इस गंभीर मामले में क्या रुख अपनाता है और पीड़ित गरीब ग्रामीण महिलाओं को उनका हक और न्याय कब तक मिल पाता है।




