

राजन सिंह चौहान
चिरमिरी एमसीबी। छत्तीसगढ़ के मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले से इस वक्त की सबसे बड़ी और सियासी गलियारों को हिला देने वाली खबर सामने आ रही है। छत्तीसगढ़ विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष और वरिष्ठ कांग्रेस नेता चरणदास महंत ने एक बेहद विस्फोटक बयान देकर राज्य की राजनीति के साथ-साथ धार्मिक जगत में भी एक नया बवंडर खड़ा कर दिया है।
चिरमिरी दौरे पर पहुंचे चरणदास महंत ने प्रसिद्ध कथावाचक जगद्गुरु रामभद्राचार्य और बागेश्वर धाम के धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री समेत देश के तमाम बाबाओं को सीधे तौर पर निशाने पर लिया है। महंत ने दो टूक शब्दों में कहा है कि वे रामभद्राचार्य को ‘जगद्गुरु’ नहीं मानते और धीरेंद्र शास्त्री सहित देश के अन्य सभी बाबा पूरी तरह से “फर्जी” हैं।
“रामभद्राचार्य संत नहीं, बीजेपी के प्रचारक हैं”
चिरमिरी में इन दिनों जगद्गुरु रामभद्राचार्य की भव्य रामकथा का आयोजन चल रहा है, जिसमें भारी संख्या में श्रद्धालु उमड़ रहे हैं। इस आयोजन से दूरी बनाते हुए चरणदास महंत ने साफ किया कि वे इस कथा को सुनने कतई नहीं जाएंगे। बाबाओं की कार्यशैली और उनकी राजनीतिक निष्ठा पर गंभीर सवाल उठाते हुए नेता प्रतिपक्ष ने कहा:
“रामभद्राचार्य जिस प्रकार से मंचों से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का प्रचार कर रहे हैं, वह किसी भी दृष्टिकोण से एक सच्चे संत के लक्षण नहीं हैं। वह सिर्फ और सिर्फ भाजपा के एजेंट और प्रचारक बनकर रह गए हैं। ऐसे बाबा धर्म की आड़ में जनता को बेवकूफ बनाने का काम कर रहे हैं।”
देखिए वीडियो
कांग्रेस नेताओं को सख्त हिदायत: “कथा में न जाएं”
चरणदास महंत का गुस्सा यहीं नहीं थमा; उन्होंने बाबाओं पर हमला बोलने के साथ-साथ अपनी ही पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं को भी कड़े शब्दों में नसीहत दे डाली है। उन्होंने स्पष्ट हिदायत देते हुए कहा:
सख्त संदेश: कांग्रेस के किसी भी व्यक्ति या कार्यकर्ता को ऐसे बाबाओं के कार्यक्रमों और दरबारों में शामिल नहीं होना चाहिए।
दूरी बनाने की अपील: जो बाबा किसी एक राजनीतिक दल का एजेंडा चला रहे हों, उनके आयोजनों से कांग्रेसियों को पूरी तरह दूर रहना चाहिए।
“हमारा भगवान तो कण-कण में है, ढोंग की जरूरत नहीं”
अपनी और कांग्रेस पार्टी की धार्मिक आस्था को स्पष्ट करते हुए चरणदास महंत ने कहा कि वे सनातन धर्म के सच्चे स्वरूप को मानते हैं, जिसमें किसी भी प्रकार के आडंबर या ढोंग की कोई जगह नहीं है। उन्होंने आगे कहा:
“हम तो उस सनातन परंपरा को मानने वाले लोग हैं जो सिखाती है कि भगवान कण-कण में व्याप्त हैं। हमारा ईश्वर हर जर्रे में है। हमें अपनी आस्था को साबित करने के लिए ऐसे राजनीतिक बाबाओं के दरबार में हाजिरी लगाने की या उनके प्रमाण पत्र की कोई आवश्यकता नहीं है।”
छत्तीसगढ़ की सियासत में उबाल, पलटवार की तैयारी
चरणदास महंत का यह ‘एक्सक्लूसिव’ और आक्रामक बयान ऐसे समय में आया है जब चिरमिरी में रामकथा को लेकर माहौल पूरी तरह भक्तिमय बना हुआ है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि महंत के इस तीखे बयान से छत्तीसगढ़ में एक नया सियासी और धार्मिक ध्रुवीकरण देखने को मिल सकता है।




