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लूट का मुकदमा दर्ज न करना पड़ा भारी, तीन पुलिस अधिकारी निलंबित

"कानून व्यवस्था की प्रभावशीलता केवल अपराधियों को पकड़ने से नहीं, बल्कि पीड़ितों को समय पर न्याय देने से तय होती है। फतेहपुर की यह घटना क्षेत्र में प्रशासनिक जवाबदेही की दिशा में एक नजीर बनेगी।"

राजन सिंह चौहान

फतेहपुर। उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले में पीड़ितों की सुनवाई न करने और गंभीर अपराध को दबाने वाले पुलिस अधिकारियों के खिलाफ प्रयागराज रेंज के पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) ने बेहद सख्त रुख अपनाया है। पशु व्यापारी से तमंचे के बल पर हुई साढ़े तीन लाख रुपये की लूट के मामले में एफआईआर (मुकदमा) दर्ज न करने और टालमटोल करने के आरोप में आईजी ने बड़ी कार्रवाई की है। मामले को गंभीरता से लेते हुए खखरेरू थानाध्यक्ष, किशनपुर थानाध्यक्ष और विजयीपुर चौकी प्रभारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। आईजी की इस हंटर कार्रवाई से पूरे पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है।

तमंचे के बल पर हुई थी ₹3.50 लाख की लूट

प्राप्त जानकारी के अनुसार, किशनपुर क्षेत्र के निवासी पशु व्यापारी शमशाद पुत्र रहमतुल्ला के साथ बीते 1 जून 2026 की रात लगभग 9 बजे अज्ञात बदमाशों ने तमंचे के बल पर करीब 3.50 लाख रुपये नगद और मोबाइल फोन लूट लिया था। पीड़ित ने घटना की सूचना तत्काल स्थानीय पुलिस को दी। सूचना पर विजयीपुर चौकी प्रभारी ने मौके पर पहुंचकर घटनास्थल का निरीक्षण भी किया, लेकिन इसके बाद खेल शुरू हो गया। सीमा विवाद (क्षेत्राधिकार) का बहाना बनाकर पीड़ित को एक थाने से दूसरे थाने दौड़ाया जाता रहा। आरोप है कि कई दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस ने पीड़ित की रिपोर्ट दर्ज नहीं की और वह न्याय के लिए भटकता रहा।

मीडिया में आने के बाद खुली लापरवाही की परतें

यह गंभीर मामला जब स्थानीय मीडिया के माध्यम से सार्वजनिक हुआ, तब जाकर उच्चाधिकारियों के कान खड़े हुए। जांच में सामने आया कि इतनी बड़ी वारदात की सूचना मिलने के बावजूद संबंधित थाना प्रभारियों और चौकी प्रभारी द्वारा न तो मुकदमा दर्ज किया गया और न ही अपने वरिष्ठ अधिकारियों को इस संबंध में कोई जानकारी दी गई।

प्रयागराज रेंज के आईजी ने मामले की विस्तृत समीक्षा के बाद इसे कर्तव्य के प्रति घोर लापरवाही, उदासीनता और स्वेच्छाचारिता माना। उन्होंने इसे जनता के प्रति पुलिस की संवेदनहीनता का पराकाष्ठा मानते हुए तत्काल निलंबन के आदेश जारी कर दिए।

गाज की जद में आए ये तीन अधिकारी

आईजी कार्यालय द्वारा जारी आदेश के तहत जिन तीन अधिकारियों को निलंबित कर पुलिस लाइन भेजा गया है, उनमें शामिल हैं:

विद्या प्रकाश (तत्कालीन थानाध्यक्ष, खखरेरू)

बच्चे लाल प्रसाद (थानाध्यक्ष, किशनपुर)

धीरेन्द्र पाण्डेय (चौकी प्रभारी, विजयीपुर)

निलंबन के साथ ही इन तीनों अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच की संस्तुति भी कर दी गई है।

दोषियों को स्पष्ट संदेश: अपराध दबाया तो नपेंगे

इस बड़ी कार्रवाई को पुलिस महकमे में एक कड़े और स्पष्ट संदेश के रूप में देखा जा रहा है। अधिकारियों को साफ चेताया गया है कि फरियादियों की अनदेखी करने, अपराध को छुपाने या मुकदमा दर्ज करने में आनाकानी करने वाले किसी भी स्तर के अधिकारी को बख्शा नहीं जाएगा। वहीं दूसरी ओर, स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने आईजी की इस त्वरित कार्रवाई का स्वागत किया है। लोगों का कहना है कि ऐसे कड़े कदमों से ही पुलिस व्यवस्था पर आम जनता का विश्वास बहाल होगा।

“कानून व्यवस्था की प्रभावशीलता केवल अपराधियों को पकड़ने से नहीं, बल्कि पीड़ितों को समय पर न्याय देने से तय होती है। फतेहपुर की यह घटना क्षेत्र में प्रशासनिक जवाबदेही की दिशा में एक नजीर बनेगी।”

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